यहां की बनी चुनरी देशभर में तो सप्लाई होती ही है।

इस शहर में 5 रुपये से लेकर 20-25 हजार रुपये की कीमत वाली चुनरी तैयार होती है। केवल नवरात्र में ही यहां पर करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। यहां जन्माष्टमी के फौरन बाद ही कपड़े में लाल चुनरी, लहंगा, पट्टका आदि दूसरी पोशाक तैयार होने लगती हैं।

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  • आखरी अपडेट:18 अक्टूबर, 2020, three:26 PM IST

नई दिल्ली। नवरात्र के दौरान जो सबसे पहली तैयारी शुरू होती है वह है माता की लाल चुनरी की। कोई नवरात्र से दो महीने पहले ही भेंट देकर चुनरी तैयार चीजें है तो कोई व्रत से एक रात पहले बाजार जाना अपनी हैससिटी की चुनरी खरीद लाता है। कीमत निश्चित रूप से अलग-अलग हो लेकिन श्रद्धा एक जैसी ही होती है। लेकिन आपको आपको पता है कि देश ही नहीं विदेशों में भी लाल चुनरी और माता रानी को पहनाई जाने वाली पोशाक यूपी के एक छोटे से शहर वृंदावन में तैयार होती हैं। यह छोटा सा शहर 5 रुपये से लेकर 20-25 हज़ार रुपये की कीमत वाली चुनरी तैयार करता है। अकेले नवरात्र में चुनरी और पोशाक का करोड़ों रुपये का कारोबार है।

जन्माष्टमी के बाद से लग रहे हैं लाल चुनरी
लाल चुनरी और माता-पिता की पोशाक तैयार करने में वृंदावन सबसे आगे है। देवी-देवताओं से जुड़ी हर तरह की पोशाक यहां तैयार होती हैं। यहां की बनी पोशाक देशभर में तो सप्लाई होती ही हैं, साथ विदेशों में भी जाती हैं। पोशाक और चुनरी के काम से जुड़े अवधेश बताते हैं कि जन्माष्टमी के फौरन बाद ही पोशाक में लाल चुनरी, लहंगा, पट्टका आदि दूसरी पोशाक तैयार होने लगती हैं। इस दौरान तैयार होने वाली चुनरी की बात करें तो 60 रुपये दर्जन के हिसाब से लेकर 2 हज़ार रुपये तक की कीमत वाली चुनरियां तैयार की जाती हैं।

यह भी पढ़ें: आपके पास भी ये वाला ₹ 10 का नोट है तो आज ही मिलेंगे 25 हजार, घर बैठे बैठे ये कामवृंदावन के घर-घर में चुनरी और पोशाक से जुड़ा काम होता है

1.5 से 2 मीटर तक की लम्बाई वाली चुनरी की डिमांड ज्यादा होती है। इसके बाद 40-50 रुपये वाली पोशाक से लेकर एक हज़ार रुपये तक की पोशाक बनती हैं। सबसे पहले दूर-दूर के क्रम पूरे किए जाते हैं। उसके बाद के आसपास के शहर और राज्यों को माल भेजा जाता है। खूब संख्या के चलते हुए में ही नहीं वृंदावन के घर-घर में चुनरी और पोशाक से जुड़ा काम होता है।

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व्यवसाय ही नहीं भक्त भी आते हैं सेवा देने
पोशाक के व्यवसाय राम नरेश का कहना है कि नवरात्र के लिए कारोबारियों की भर्ती तो जन्माष्टमी के लाइसेंस पूरा होते ही शुरू हो जाते हैं। लेकिन नवरात्र के एक और दो महीने पहले से ही सीधा भक्तों की भर्ती भी आने वाली हैं। यह वो लोग होते हैं जो अपनी श्रद्धा अनुसार 5 से लेकर 25 रुपये की कीमत वाली चुनरी और 50-50 हज़ार रुपये तक की पोशाक तैयार करते हैं। यह नंबर देश के बड़े मंदिरों सहित घरों में बने मंदिरों में माता-पिता की मूर्तियों के लिए होते हैं। मूल रूप से ऐसी संख्या में कपड़े के रूप में कपड़े के रूप में मायने नहीं रखता है क्योंकि पोशाक और चुनरी पर होने वाला एसएमएसवर्क महत्वपूर्णता रखता है।



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